गुरुदेव ज़ी से जुड़कर भी हम अपने आपको परिवर्तित ना कर सकें तो ये एक विचारणीय विषय है: शिव बहादुर सिंह, प्रदेश अध्यक्ष भगवती मानव कल्याण संगठन शाखा हरियाणा

@डेस्क न्यूज। देवताओं के लिये अति दुर्लभ मानव जीवन को पाकर भी तमाम विकारों में लिप्त होकर जीवन यापन करने वाले लोगों को एक बार दुबारा से सोचने का अवसर प्राप्त हो रहा है। हमारे जीवन का एक मात्र उद्देश्य सिर्फ गुरुदेव ज़ी की विचारधारा का अक्षरशः पालन होना चाहिये। अधिकाँश लोग भौतिकता की चका चौंध में भटकाव का जीवन जीने लगते हैँ।

शुरुआती दौर में सभी लोग अच्छी तरह से जीवन जीने का संकल्प लेते हैँ ,कुछ समय उपरान्त जब संपन्नता हो जाती है तब धीरे-धीरे साधनात्मक क्रमों से दूरी बना लेते हैँ। कुछ वर्षों बाद जब तमाम समस्याओं में घिर जाते हैँ तब फिर से माँ गुरुवर की याद आती है। आप शुरू से ही गम्भीर रहिये और सन्तुलित बने रहिये। सजग रहिये और नियमित साधना करते रहिये। जब-जब साधना से हम दूर होंगे तब-तब हम परेशानियों का सामना करेंगे। इसके लिये हमें मानव जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझना होगा। हम लोग पिछले सात जन्मों के कर्मों को लेकर पैदा हुये हैँ। पूर्व जन्मों के अच्छे और बुरे कर्मों का फल हम सभी को भुगतना सुनिश्चित है। अतः हमें गुरुदेव ज़ी द्वारा निर्देशित साधना क्रमों को हमें जीवन का अभिन्न अंग बनाना ही होगा। नये वर्ष में हम सभी को संकल्पित होना होगा कि तमाम व्यस्तताओं के बावजूद हम साधना जरूर करेंगे। जब हम नियमित साधना करेंगे तो हम सुदृढ़ होने लगेंगे और दूसरों को भी व्यवस्थित करने लग जाएंगे।नियमित साधना द्वारा भटकाव समाप्त हो जाता है।
कई लोग दूसरों के बारे में इतने परेशान रहते हैँ और जब अपनी बारी आती है तो दीपक तले अंधेरा ही नजर आता है। आप पहले स्वयं को मजबूत कीजिये। उसके बाद ही आप दूसरों को बोलिये। आरती और चालीसा पाठ के क्रमों में रुचि बढ़ाइये। इन क्रमों द्वारा ऊर्जा का संचयन होता है। बुरे कार्योँ द्वारा ऊर्जा नष्ट होती है। अतः बुरे कार्योँ से और बुरे लोगों से दूरी बना लीजिये। अपने साथ उन्हीं लोगों को रखिये जो गुरुदेव ज़ी द्वारा निर्देशित साधना क्रमों का अक्षरशः पालन करते हों। नये वर्ष में नयी ऊर्जा के साथ संगठन के कार्योँ में सहयोगी क़ी भूमिका निभाइये । संगठन के कार्योँ में समय दें और लोगों को सदैव प्रेरित करते रहें। आप ये मान लीजिये कि नये लोगों को संगठन से जोड़ने का तात्पर्य है कि अपने लिये हम पूण्य अर्जित कर रहे हैँ। तोड़ फोड़ और ईर्ष्या द्वेष का कार्य पतन के मार्ग हैँ। प्रगति तभी होगी जब हम गुरुदेव ज़ी के अति महत्व पूर्ण चिन्तनों को अपने जीवन में आत्मसात करेंगे।
















