विश्व शांति के लिए सन्त उमाकान्त जी महाराज की धार्मिक अपील सहित चेतावनी, विश्व की महाशक्तियां भारत आकर विश्व शांति की गोष्टी करें वर्ना आगे का समय विनाशकारी बचे वही जो नाम आधारी

जगत रक्षार्थ महात्मा उमाकान्त जी महाराज की हार्दिक अपील भारत आकर विश्व शांति की गोष्ठी की जाए वर्ना विनाश अवश्यंभावी
@खजुराहो/ बमीठा-अशोक नामदेव। सबकी भलाई चाहने वाले सबको शाकाहारी नशामुक्त बनाकर कुदरत के प्रकोप से बचाने वाले परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकांत जी महाराज ने बताया कि खजुराहो में दो दिवसीय सत्संग व नामदान कार्यक्रम में देश के कोने कोने आए हुए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि स्वयं संकटों से बचना है और लोगों को बचाना है कोई भी देश घातक हथियार नहीं बनाएगा यह समझोगे समझ जाए तो विनाश बचाकर विकास हो सकता है कुछ लोग तो ऐसा सोचते हैं लोग मर जाएं कट जाए हमारी शान सत्ता कायम रहनी चाहिए विदेश के जिम्मेदार अगर भारत की ऋषि मुनि संत महात्मा की धर्म भूमि पर आकर विश्व शांति की गोष्टी करें तो बचत हो सकती है वरना आगे का समय विनाशकारी बचे वही जो नाम अधारी।

मारने और मारकाट करवाने की बड़ी सख्त सजा मिलती है
संत उमा कान्त जी महाराज ने देश हित की बात समझाते हुए कहूं कि गऊ हत्या – जीव हत्या की कमाई से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। ऐसी कमाई से बचना चाहिए। बाबा जी ने सबको चेताया कि आप हुकूमत में हैं और जनता का विनाश करा दिया तो क्या आपको नहीं मालूम कि इसकी सजा नर्को में कठोर यातनाएं सहनी पड़ती हैं। मानव धर्म अलग है और शरीर का धर्म अलग है आप तो बात मानते नहीं हो और फायदा पूरा चाहते हो अब तो न्याय करने वाला इंसाफ के तख्त पर बैठकर न्याय करने वाला है।

बाबा जी ने इंदौर का अपने साथ घटित दृष्टांत सुनाते हुए कहा – हमारे गुरु महाराज बाबा जय गुरुदेव जी महाराज के समय में एक आदमी उनसे मिलने आया। रोक ने के बाद भी वह आगे बढ़ते हुए बोला हमको महात्मा जी से मिलना है। इतने में गुरु महाराज आ पधारे। तब वह बोला यानी उसमें मौजूद प्रेत बोला कि मुझे माफ़ कर दीजिए । मैं 600 सिपाहियों का बादशाह था। धन इकट्ठा करने के लालच में बहुत लोगों को मरवा दिया। तब गुरु महाराज ने कहा इस बच्चे को क्यों परेशान कर रखा है। तब बोला मेरा घर इन्होंने खरीद लिया। इसलिए आप को भी कहता हूं कि जब कभी मकान खरीदो तो नया खरीदो। गुरु महाराज ने उस भूत से कहा इसे छोड़ दो। तब बोला मेरे साथ 12 प्रेत और हैं ।

छोटा बन जाने पर महानता आ जाती है
उन्होंने कहा संगत के जिम्मेदारों को संगत के लोगों को यह बात बतानी चाहिए कि गुरु महाराज पहले हाथ जोड़ते थे फिर आप जोड़ते थे। उन्होंने हाथ जोड़ना, प्रणाम करना सिखाया, छोटा बन जाने पर महानता आ जाती है। और गृहस्थ का धर्म समझाते हुए कहा – कोई भूखा प्यासा है। आपके दरवाजे पर आ गया, आ जाए उसको खिलाओ पिलाओ। अपने से अच्छे स्थान पर बैठाओ अच्छी व्यवस्था करो।

कुछ ऐसे लोग होते हैं मेहनत और कोई करता है और उसका श्रेय कोई और ले जाता है। यही तो लोग धोखा खाते हैं। संत जी ने सच्चे अर्थों में धर्म अपनाने की आवश्यकता प्रतिपादित करते हुए कहा कि आज तो ज्यादा पैसा कमाने के लिए बूचड़खाने बढ़ते जा रहे हैं । धर्म ओढ़ा नहीं जाता पहना नहीं जाता है बल्कि धर्म धारण किया जाता है। इसीलिए महात्मा जो सत्य बोलते हैं उनके पास लोग जाते नहीं हैं । जाने जाने में बड़प्पन नहीं जान बचाने में बड़प्पन है।
अशोक नामदेव बमीठा

















