छतरपुर

जिला जेल मामला: बुधवार को सजा और गुरुवार को कैदी ने कि आत्महत्या? सेंट्रल जेल अधीक्षक ने 2 जेल प्रहरियों को किया सस्पेंड

जेल छतरपुर में छत से कूदकर आत्महत्या का पहला मामला,जेल प्रशासन में मचा हडकप, आज होगा पीएम

@छतरपुर-आशुतोष द्विवेदी। प्रदेश में छतरपुर जिला अति संवेदनशील की श्रेणी में माना जाता है, और छतरपुर जिला जेल में पिछले कई सालों से जेल अधीक्षक का पद खाली है। जिला जेल छतरपुर जेलर के भरोसे चल रही कई सालों से। जिला जेल छतरपुर में रोजाना केदियों कि क्षमता डबल रहती है, फिर भी जिला जेल छतरपुर में जेल अधीक्षक नही है, प्रभारियों के भरोसे चल रही जिला जेल। जिला जेल छतरपुर पिछले कई माहों से शुर्खियों मे बनी हुई है। लेकिन यह शुर्खियां अब थमने का नाम नही ले रही है, आये दिन कोई न कोई घटना जेल में घटित हो रही है। जिससे जेल प्रशासन की छबि जिला में नही पूरे प्रदेश में खराब हो रही।

बीते रोज जेल प्रहरी पुष्पा अहिरवार कैंटीन इंचार्ज द्वारा जेल में झाड़ू न लगाने के अलावा सभी प्रकार कि सुविधाओं कि सुविधाशुल्क का विडिओ तेजी से वायरल हुआ था, बीडियो बायरल होने पर उसे निलंबित कर सेंट्रल जेल सतना अटैच करने का मामला अभी शांत भी नही हुआ था कि गुरूवार की दोपहर 3:30 बजे सजायाफ्ता कैदी ने जेल की बैरिक की छत से छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। मृतक कैदी की पहचान शंकर प्रजापति पुत्र ननुआ प्रजापति उम्र 22 वर्ष निवासी उर्दमऊ थाना गढ़ीमलहरा के रूप में हुई है। मृतक शंकर प्रजापति वर्ष 2023 से जिला जेल में विचाराधीन कैदी के रूप में बलात्कार एवं पास्को एक्ट के मामले में बंद था। उसे 24 दिसम्बर 2025 को न्यायालय द्वारा बलात्कार एवं पास्को एक्ट के मामले में अलग अलग सजा सुनाई गई थी। लेकिन सजा होने के दूसरे दिन ही कैदी ही ने छत से कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

जानकारी के अनुसार गुरूवार को क्रिसमस डे था और जेल परिसर के अंदर कैदियों को भोजन में पूडी सब्जी वितरित की गई थी। इसी दौरान कैदी शंकर प्रजापति बैरिक नम्बर 01 के पीछे गया और वहां बने हुए शौचालय के ऊपर चढकर बैरिक नम्बर 01 की छत पर चढ गया और वहीं छत से ही अस्पताल की तरफ मैदान में छलांग लगा दी। जैसे ही प्रहरियों ने कैदी को नीचे गिरा देखा तत्काल जेलर को सूचना दी। सूचना मिलते ही जेलर ने जेल की एम्बूलेंस के माध्यम से घायल शंकर प्रजापति को जिला अस्पताल भेजा, लेकिन जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

खबर लगते ही कोतवाली टीआई अरबिंद सिंह दांगी जिला अस्पताल पहुंचे और मृतक कैदी के शव को पोस्टमार्टम कक्ष में मरचूरी पर रखबाया गया है। शुक्रवार को डॉक्टरों के पैनल के द्वारा शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा। मृतक कैदी के परिजनों को भी सूचना दे दी गई है। सम्भवत: मृतक के परिजनों के आने के बाद ही कैदी के शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा। सतना सेन्ट्रल जेल अधीक्षक ने जिला छतरपुर जेल में कैदी की मौत के बाद सुरेंद्र तिवारी और उमाकांत मिश्रा को किया सस्पेंड।


अभी एक सप्ताह पहले ही जिला जेल में ग्राम कितपुरा के 2 कैदियों के बीच बिवाद हुआ और विचाराधीन कैदी लख्खू राजपूत ने सजायाफ्ता कैदी हाकिम सिंह पर सोते समय पत्थर से सिर पर हमला कर दिया था। इस हमले में हाकिम सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे जिसे जिला अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद ग्वालियर गंभीर हालत में रिफर कर दिया गया था और आज भी हाकिम सिंह ग्वालियर में उपचार करा रहा है।


कैदी की आत्महत्या की खबर मिलते ही अपर कलेक्टर मिलिंद नागदेवे जिला जेल पहुँचे और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। जेल प्रशासन और पुलिस विभाग अब इस बात की बारीकी से जांच कर रहे हैं कि सुरक्षा में चूक कहाँ हुई और कैदी छत तक पहुँचने में कैसे सफल रहा। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस खौफनाक कदम के पीछे असली वजह सिर्फ सजा का तनाव था या कोई अन्य कारण।

कैदियों को सुविधा देने कि एवज में पैसे लेते वीडियो वायरल होने पर जेल प्रहरी पुष्पा अहिरवार को सेन्ट्रल जेल अधीक्षक ने किया निलंबित –

इस घटना के एक दिन पहले जिला जेल की कैन्टीन में तैनात जेल प्रहरी पुष्पा अहिरवार द्वारा कैदी के परिजनों से कैदियों को सुविधा देने कि एवज में पैसे लेते वीडियो वायरल होने पर जेल प्रहरी पुष्पा अहिरवार को सेन्ट्रल जेल अधीक्षक द्वारा निलंबित कर सेन्ट्रल जेल सतना किया अटैच। वहीं जेल डीआईजी अखिलेश तोमर रात को ही छतरपुर पहुंचे और जेल जाकर सम्पूर्ण घटनाक्रम की जांच की। तो वहीं जेलर दिलीप सिंह जाटव का कहना है कि कैदियों को कैन्टीन के माध्यम से 2 हजार रूपए का सामान एक माह में भेजने की व्यवस्था है और इसी सामान के बदले में जेल प्रहरी पुष्पा अहिरवार द्वारा कैदी के परिजनों से पैसे लिए गए थे ना कि अन्य सामग्री भेजने के लिए।

पूर्व जेलर एमएस मराबी का कार्यकाल याद कर रहे लोग –छतरपुर जेल में पहले जेलर के पद पर एमएस मराबी जेलर पदस्थ थे। उन दिनों जेल की व्यवस्थाएं ऐसी थी जैसा की लोग कहते रहते है कि यह जेल है और आज भी लोग। वा कैदी पूर्व जेलर मराबी, पाण्डेय के कार्यकाल को याद कर रहे है। क्योंकि यहां उनके कार्यकाल में व्यवस्थाएं चौकस होने के साथ ही बंदियों के खाने पीने से लेकर स्वास्थ्य परीक्षण तक की समुचित व्यवस्थाएं देखने को मिल रही थी। सबसे बड़ी बात कि श्री मराबी जेलर के कार्यकाल में जेल परिसर के अंदर कभी मोबाईल नाम की चीज देखने को नहीं मिली और ना ही बंदियों को मादक पदार्थ मिल पाते थे। उन दिनों छतरपुर जेल प्रदेश में सबसे शांत जेल मानी जाती थी, लेकिन स्थाई जेल अधीक्षक की पदस्थापना छतरपुर में ना होने पर आज जेल के हालात बद से बदतर होते जा रहें है।

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