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डॉ० घनश्याम भारती ने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में विश्व साहित्य में श्रीराम विषय पर दिया व्याख्यान

आगरा यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित संगोष्ठी में सम्मिलित हुए कई देशों के प्रोफेसर्स, शोधार्थी एवं साहित्यकार

सागर। शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गढ़ाकोटा के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर डॉ०घनश्याम भारती ने डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर सारस्वत अतिथि के रूप में सहभागिता की। इस संगोष्ठी में डॉ०भारती ने विश्व साहित्य में श्रीराम विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। अपना व्याख्यान देते हुए डॉ० भारती ने कहा की विश्व की कई भाषाओं में रामकथा पर केंद्रित 300 से अधिक रामायण लिखी जा चुकी हैं।

इन सभी ग्रंथों में रामकथा को व्यापकता के साथ चित्रित किया गया है। डॉ० भारती ने विदेशों में रामलीला के मंचन पर भी विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व के कई देशों में कलाकारों द्वारा रामलीला का मंचन किया जा रहा है। भारत में नहीं तो अमेरिका तथा अन्य देशों में रामलीला का भविष्य सुरक्षित है, अमेरिका के कैलिफोर्निया में रामलीला कई वर्षों से खेली जा रही है, रामलीला के माध्यम से रामकथा का व्यापक प्रचार-प्रसार हो रहा है। उन्होंने रामकथा के आदिग्रंथ वाल्मीकि रामायण तथा ओरछा के महाकवि केशवदास द्वारा लिखित रामचंद्रिका की भी विस्तृत चर्चा की।

आगरा यूनिवर्सिटी के हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के मानस मर्मज्ञ प्रोफेसर उमापति दीक्षित, आगरा यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रोफेसर आशुरानी, लंदन के प्रवासी साहित्यकार श्री तेजेंद्र शर्मा, मास्को स्टेट रीजनल यूनिवर्सिटी रूस की प्रोफेसर यूलिया अलेशकीना, प्रोफेसर पूनम सिंह, प्रोफेसर वंदना अग्रवाल, भारत सरकार की हिंदी सलाहकार डॉ० रुचि चतुर्वेदी, आगरा के वरिष्ठ समाजसेवी श्री मुकेश जैन, रामायण केंद्र मॉरीशस की अध्यक्ष विनोद वाला जी तथा संगोष्ठी के संयोजक आगरा यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रदीप श्रीधर के साथ देश-विदेश के कई प्रोफेसर्स, शोधार्थी तथा साहित्यकार मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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