मध्यप्रदेश

बोगस नियुक्ति तिथियों का फाइव स्टार टांगे घूम रही गौरी भाऊ की बहू धारणा बिसेन

जबलपुर। पूर्व मंत्री बालाघाट गौरी भाऊ की भतीजी बहू शरद की पत्नी सहायक प्राध्यापक जूलॉजी कृषि कॉलेज बालाघाट धारणा बिसेन का मामला यह बताता हैसमरथ को नहीं दोष गोसाई- शिवराज के मंत्रिमंडल में गौरीशंकर बिसेन कृषि मंत्री थे। गौरी शंकर बिसेन ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ विजय सिंह तोमर को हटाकर अपने छोटे भाई रक्तसंबंधी डॉक्टर प्रदीप कुमार बिसेन को कुलपति के पद पर मनोनयन कराया।

कुलपति पद पर मनोनीत होने के पहले डॉक्टर पी के
बिसेन डीन फैकल्टी और डीएसडब्ल्यू जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में थे। तब तक वर्ष 2015 में चयन समिति के पदेन अध्यक्ष होने के कारण डीन फैकल्टी डॉक्टर प्रदीप कुमार मिश्रा ने अपने रक्तसंबंधी सगे बेटे शरद बिसेन की वर्ष 2015 में कृषि कॉलेज बालाघाट में सहायक अध्यापक उद्यान के पद पर खुद नियुक्ति करली थी।

शरद बिसेन इस बात से बहुत परेशान थे कि उनकी पत्नी बालाघाट से 40 किलोमीटर दूर गोंदिया में एक प्राइवेट कॉलेज में कथित तौर पर सहायक प्राध्यापक थी। डॉक्टर धरना गोंदिया के  अशासकीय घोटेबंधु साइंस कॉलेज में सहायक प्राध्यापक जूलॉजी थी या नहीं थी यह भी जांच का विषय है। आज हम इसी विषय पर आगे जाकर चर्चा करेंगे की जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में डॉक्टर धारणा रामकिशोर टैमरे बिसेन की पांच नियुक्ति तिथियां किस प्रकार दर्ज हैं। इन पांच नियुक्ति तिथियां को उसे समय चयन समिति के पदेन अध्यक्ष और डीन फैकल्टी वर्तमान कुलगुरु डॉक्टर प्रमोद कुमार मिश्रा ने क्यों नजर अंदाज किया। सब कुछ तय योजना के अनुसार चला।

शरद ने बालाघाट में अपनी पत्नी धरना रामकिशोर टेंभरे बिसेन से सादे कागज पर एक प्रतिनियुक्ति का आवेदन 19.10.2016 लिखवाया और कृषि विश्वविद्यालय में प्रस्तुत किया। धरना के प्रतिनियुक्ति आवेदन 19.10.2016 में एकदम साफ लिखा है कि उसे पति के साथ शासकीय राजा भोज कृषि कॉलेज मुरझड़ फार्म तहसील वारासिवनी जिला बालाघाट में पदस्थ कर दिया जाए। एकदम साफ है कि व्यक्तिगत और निजीहित को साधने गौरी शंकर बिसेन और उनके भाई पीके विषय ने शासन और प्रशासन का दुरुपयोग किया है।

इस आवेदन का विधिक पहलू यह है कि प्रतिनियुक्ति का कोई भी आवेदन सादे कागज पर कभी नहीं लिया जाता जब तक की मध्य प्रदेश मूलभूत नियम के प्रकाश में प्रतिनियुक्ति के विज्ञापन के जरिए अभ्यर्थियों से निश्चित तिथि तक आवेदन आमंत्रित नहीं किए जाएं।
लेकिन धरना का मामला अपवाद है। पूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज की राजनीतिक छत्रछाया इतनी  जबरदस्त  है कि  किसी की हिम्मत नहीं पड़ी , कोई कुछ पूछ ले कि सही क्या है और गलत क्या है।

मध्य प्रदेश मूलभूत नियम में वर्णित प्रतिनियुक्ति के मार्गदर्शी सिद्धांत में निजी हित में पति के साथ पदस्थ करने के लिए सादे कागज पर प्रतिनियुक्ति का आवेदन लेने का कोई मार्गदर्शन वर्णित नहीं है। इसके बावजूद चयन समिति के पदेन अध्यक्ष डॉ प्रमोद कुमार मिश्रा ने सहायक कुल सचिव बैठक प्रशांत कुमार श्रीवास्तव को मार्गदर्शन देकर प्रशासनिक परिषद की 166वीं बैठक 21.07.2017 में धारणा की प्रतिनियुक्ति का अनुमोदन कर दिया। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार अशोक कुमार इंग्ले ने 16.8.17 को डॉक्टर धरना का प्रतीनियुक्ति आदेश निकाला।

डॉक्टर धरना ने 25.8.2017 को कृषि कॉलेज बालाघाट में गौरी भाऊ की बहू के रूप में ठसक से प्रतिनियुक्ति पर पदभार ग्रहण 25.8. 2017 किया। प्रतिनियुक्ति का आदेश 16.8.17 जारी करने के दरमियान कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के किसी भी अधिकारी ने यह पता लगाने की कोशिश नहीं की कि धारणा का प्रतिनियुक्ति आवेदन 19.10.2016 की पहली लाइन में महाराष्ट्र शासन में 10.9. 2017 से नियुक्ति अर्थात सेवा करने का लेख है तो तदविषयक महाराष्ट्र शासन के अभिलेख कहां है। जबलपुर जबलपुर विश्वविद्यालय के दो नारू कारू सहायक कुल सचिव विधि बैठक प्रशांत श्रीवास्तव और दूसरा सहायक कुलसचिव एवं अनुभाग अधिकारी स्थापना एक प्रशांत श्रीवास्तव ,(दोनों लाला)ने भी महाराष्ट्र शासन में 10.9.2013 से  धरना की नियुक्ति का आदेश  नहीं मांगा।

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय से धारणा की प्रतिनियुक्ति पर 9.12.2022 को आरटीआई आवेदन में चाहे गए 12 बिंदुओं में से केवल चार बिंदुओं की जानकारी देने के बाद और शेष आठ बिंदुओं की जानकारी नहीं देने पर यह स्पष्ट हो गया  था कि पूरी तरह धोखाधड़ी, छल फरेब कदाचरण षड्यंत्र और पद के दुरुपयोग का मामला है। इसके बाद लगातार लगाए जा रहे आरटीआई आवेदनों के माध्यम से प्राप्त हुई जानकारी से यह पता चला की धारणा की कुल पांच नियुक्ति की तारीख  जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में है।
इनमें से तीन तारीख
महाराष्ट्र की हैं। शेष 2 तारीख जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय और राजा भोज कृषि कॉलेज तहसील वारासिवनी जिला बालाघाट की हैं।

पहला आदेश नियुक्ति की पहली तारीख
धरना का महाराष्ट्र शासन में पहली नियुक्ति आदेश 10.9.2012 धरना के प्रतिनियुक्ति आवेदन 19.10.2016 के अनुसार महाराष्ट्र शासन में सेवा शुरू करने की तिथि 10 9 2012 है।।

दूसरा आदेश नियुक्ति की दूसरी तारीख-
धोतेबंधु साइंस कॉलेज में नियुक्ति आदेश 14.9.2012 धोते बंधु साइंस कॉलेज गोंदिया के प्राचार्य के प्रमाण पत्र के अनुसार धोतेबंधु साइंस कॉलेज में डॉक्टर धारण की सेवाएं 14 सितंबर 2012 से शुरू हुई हैं।। ऐसा धोते बंधु साइंस कॉलेज की प्राचार्य का प्रमाण पत्र बता रहा है।।

तीसरा आदेश नियुक्ति की तीसरी तारीख-
संत तुकडोबा नागपूर विद्यापीठ नागपुर में धरना का नियुक्ति आदेश 7.11.2012
घोटेबंधु साइंस कॉलेज गोंदिया में 14.9.2012 में डॉक्टर धारण की नियुक्ति के दो से ढाई महीने के भीतर धरना की नियुक्ति संत तुकडोबा नागपुर विद्यापीठ नागपुर में 7.11.2012 को जूलॉजी के सहायक प्राध्यापक के पद पर अन्य तीन सहायक प्राध्यापकों के साथ नियुक्ति  आदेश 7.11.2012 जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में है।

ध्यान रहे महाराष्ट्र के गोंदिया के  धोतेबंधु साइंस कॉलेज का कोई नियुक्ति आदेश और नियुक्ति के पूर्व सहायक प्राध्यापक जूलॉजी के पद पर भरती के लिए जारी कोई विज्ञापन का रिकॉर्ड जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में धारणा  बिसेन ने प्रस्तुत नहीं किया है।।

चौथा आदेश नियुक्ति की चौथी तारीख-
राजा भोज कृषि कॉलेज बालाघाट में धरना ने अपनी हस्त लिपि से सीसीएल आवेदन में मध्य प्रदेश शासन में नियुक्ति की तारीख 14.9.2012 तत्पश्चात 1 वर्ष की परीक्षा अवधि की समाप्ति की तारीख 14.9.2013 का लेख किया है।।

पांचवा आदेश नियुक्ति की पांचवी तारीख-
राजा भोज कृषि कॉलेज से जब धरना की वास्तविक प्रतिनिधि आदेश मांगा गया तो आरटीआई में जवाब आया कि मध्य प्रदेश राज्य शासन में 14.9.2012 से धरना की नियुक्ति संबंधी कोई अभिलेख रिकॉर्ड में नहीं है।

धरना की प्रतिनियुक्ति जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के आदेश 16.8.2017 से हुई है। मजे की बात देखिए की पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में यह सब खेला हुआ । विधानसभा में ध्यान आकर्षण सूचना क्रमांक 57 07.09.2022 मैं पूरा मामला विधानसभा में उठा तो उसे ठंडे बस्ती में डाल दिया गया। इसे ही कहते हैं सैयां भए कोतवाल तो अब डर काहे का। ऊपर लिखित धारण की पांच नियुक्ति तारीखों में से केवल सबसे अंतिम 16.8.2017 की प्रतिनियुक्ति की अभिलेख पूरी तरह धोखाधड़ी, छल फरेब, मक्कारी, कूट रचना कदाचरण पद का दुरुपयोग और षड्यंत्र  से तैयार किए गए हैं। तो शेष चार नियुक्ति आदेशों के भी पूरी तरह फोर्स फॉल्स बोगस होने में संदेह नहीं किया जा सकता है।

हाथ कंगन को आरती क्या पढ़े-लिखों को फारसी क्या।
यह सारा कमाल कराने में भाजपा के यशस्वी प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा के ससुर और वर्तमान कुलगुरु पीके मिश्रा का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है। क्योंकि उन्हें पीके बिसेन के बाद नया कुलगुरु बना था इसीलिए वफादारी दिखाना बहुत जरूरी था। डॉ प्रमोद कुमार मिश्रा ने आगे कहां-कहां विश्वविद्यालय के साथ वफादारी और इमानदारी निभाई है हम आगे भी आपको बताएंगे। इसी का इनाम मुझे मिला कि बीडी शर्मा ने मुख्यमंत्री जैसी कुर्सी को प्राथमिकता से हटाते हुए ससुर की ताजपोसी को प्राथमिकता दी और जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक कुलगुरु बनाने में सफल हुए हैं।

अब आप विचार कर लीजिए की जब शिवराज के एक मंत्री गौरी शंकर बिसेन का यह हाल है तो शिवराज और उनके बाकी मंत्रियों का कितना जलता रहा होगा।
अकेले प्रधानमंत्री और उनके गृहमंत्री अमित शाह क्या-क्या देखेंगे। अमित शाह जिसको तथास्तु कहते हैं वही भस्मासुर बनकर दिए गए आशीर्वाद की परीक्षा लेने चढ़ चढ़ दौड़ रहा है। पुलिस प्रशासन के उन तीन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को समर्पित है जिनके साथ रहकर मैंने कानून की बड़ी क्यों का अध्ययन किया है और समझा है। ईश्वर करे वह जहां भी हो बहुत आनंद से हो। यह तीन शख्सियत है पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रताप सिंह, पूर्व पुलिस महानिदेशक वीपी सिंह, पूर्व पुलिस महानिदेशक अवध नारायण सिंह।

तीनों शख्सियत जबलपुर में प्रस्तावना के दौरान मुझे भरपूर समय देती थी और कई कई घंटे हम लोग तमाम विषयों पर तार्किक बात करते थे मेरी उम्र उसे समय कम थी लेकिन मुझे ऐसे अनुभवी पुलिस अधिकारियों के साथ काम करने का मौका मिला इसे मैं अपनी उपलब्धि मानता हूं। आपके सामने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के करीबी और बालाघाट के पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन के कुनबे का छल फरेब और धोखा को परतदार परत खोल कर रखा है। मेरा बड़ा साफ कहना है कि जनता ने इसीलिए भाजपा सरकार चुनकर नहीं भेजी है की कृषि विश्वविद्यालय को रक्तसंबंधियों की भर्ती का अखाड़ा बना लिया जाए।

प्रतीक्षा कीजिए अभी आगे कुलगुरु डॉक्टर प्रमोद कुमार मिश्रा प्रदेश के यशस्वी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा और उनसे जुड़े लोगों की कहानी आना बाकी है।
(जबलपुर से वरिष्ठ पत्रकार दिग्विजय सिंह की रिपोर्ट)

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