SIR से देश वासियों को होगा लाभ घुसपैठिये होंगे देश से बाहर: आशुतोष द्विवेदी संपादक शक्ति न्यूज

@डेस्क न्यूज। आज कल SIR को लेकर देश भर में तरह तरह की अफवाहे फैलाई जा रही हैं जबकि SIR देश के लिए बहुत जरूरी हैं इससे हमारे देश में रह रहे घुसपैठियों को को मिलने वाला फायदा उनकी जगह हमारे देश के असली हक़दारों को मिलेगा जिससे भारत देश में जन्म लेने वाले शासन की हर सुबिधाओं का लाभ आसानी से ले सकेंगे। फॉर्म क्या आया— पूरा समाज पानी पूरी वाली लाइन की तरह खड़ा हो गया,तीन अक्षरों का फॉर्म,लेकिन इतना गहरा कि अच्छे-अच्छे पढ़े-लिखे लोगों का “हम तो सब जानते हैं” वाला भ्रम फट से टूट गया।

SIR की दिलचस्प बातें, रिश्तों की रियलिटी चेक-
SIR ने साफ बता दिया- मां-बाप, दादा-दादी ही असली रिश्ते हैं,बाकी सब “जान-पहचान सूची” में आते हैं,
और मज़ेदार बात ये कि— बेटियाँ शादी के बाद कितनी भी दूर चली जाएँ,रिश्ता मायके से ही साबित होता हैं— कागजों में,समाज में,और दिल में।
SIR टूटे हुए रिश्तों में नेटवर्क सिग्नल वापस-
सालों से बात न करने वाले लोग अब फॉर्म भरवाने के नाम पर बीवी के मायके जा रहे हैं, बेटियाँ गाँव लौट रही हैं,लोग दस्तावेज़ ढूँढते-ढूँढते वंश-वृक्ष खोज रहे हैं। SIR ने वो रिश्ते जोड़ दिए जो व्हाट्सऐप भी नहीं जोड़ पाया।
SIR धर्म का भ्रम… SIR के आगे फ़ेल-
हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई— सब एक ही काउंटर पर लाइन में खड़े,एक ही पेन से फॉर्म भरते हुए। SIR ने वो कर दिया जो नेताओं की रैलियाँ नहीं कर पाई सबको एक ही नाव में सवार कर दिया।
SIR पुरानी यादें Rewind Mode में-
लोग आज फिर वही जगह ढूँढ रहे जहाँ— माँ-बाप रहा करते थे,दादा-दादी की छाया थी, और बचपन की धूल थी, किराएदार अपने मां-बाप का नाम उसी मकान मालिक से पूछ रहे हैं,
जिसे कभी किराया देना पड़ता था। इतिहास अब फेसबुक पोस्ट नहीं— घर-घर की खोज बन गया हैं।
SIR शिक्षा की असली औकात सामने-
SIR ने बता दिया— यह दुनिया पैसा नहीं,दस्तावेज़ माँगती हैं,
शिक्षा सिर्फ नौकरी नहीं, अपना वंश और पहचान जानने की योग्यता भी हैं,
SIR पुरखे सिर्फ फोटो नहीं—साक्ष्य हैं,-
SIR ने साबित कर दिया— मां-बाप मरकर भी काम आते हैं,वे कागज़ों में,यादों में,और वंश में ज़िंदा रहते हैं,
इसलिए:
उन्हें याद करो, सम्मान दो, और अपनी जड़ें बच्चों को भी बताओ।
SIR सबसे चुभता सच-
जब किसी से पूछा— “तुम्हारे दादा-दादी, नाना-नानी का नाम?” तो आधे लोग नेटवर्क खोजते हैं,बाकी आधे गूगल नहीं, मम्मी को कॉल करते हैं। ये सिर्फ जानकारी नहीं— कटी हुई जड़ों की निशानी हैं,
SIR निष्कर्ष-
SIR अभी शुरू हुआ हैं…
आगे कितने किस्से, कितनी कहानियाँ और कितने राज खुलेंगे— बस इंतज़ार करिए, देश भर में वंशावली का महाकाव्य लिखने वाला हैं।

















