विश्वविद्यालय ने बैठक में कार्यपरिषद को गुमराह करने का किया प्रयास

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय की 3 अप्रैल 25 की बैठक में 10 दिन बाद कुलपति शुभा तिवारी ने भाग लिया जिसमें विश्वविद्यालय ने सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया, ओबीसी आरक्षण के संबंध में बिन्दु क्रमांक 5 पर कार्यपरिषद सदस्यों से अनुमति प्राप्त करने का प्रयास किया जिससे न्यायालय में चल रहे प्रकरण की याचिका की अगली सुनवाई 8 अप्रैल के पूर्व अपना पक्ष रख सकें। परंतु कार्य परिषद के सदस्य नीतेश शर्मा ग्वालियर, राधे शुक्ला छतरपुर ने कुलसचिव से स्पष्ट कहा कि जब तक प्रकरण मप्र उच्च न्यायालय में विचारणीय है तब तक इस पर कोई पूर्व निर्णय नहीं लिया जा सकता।
कुलसचिव ने अपने एजेण्डा क्रमांक 5 में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत एवं रोस्टर अनुसार 10 विषयों के कुल 40 पद विज्ञापित किए थे जिसमें ओबीसी के 10 पद हैं जिनमें 8 पद ओपन एवं 2 पद महिलाओं के लिए हैं तथा जिन विषयों में फार्म की छात्र संख्या 3 से कम आई है विश्वविद्यालय मीटिंग में पास करवाना चाहता था कि ऐसे विषयों में सामान्य श्रेणी के लोगों को सीधे साक्षात्कार में बुलाया जाए परंतु कार्यपरिषद ने कहा कि यह नियम विरूद्ध है सीधे साक्षात्कार नहीं बल्कि उनके पुन: विज्ञापन नियमानुसार आमंत्रित करना चाहिए। ज्ञात हो कि सहायक प्राध्यापकों ने मप्र उच्च न्यायालय में अपनी याचिका 7778/25 दायर की है जिसकी सुनवाई 8 अप्रैल को है इसलिए यह कार्यपरिषद सुनवाई के पूर्व संशोधन कराना चाह रहे थे जिसे कार्यपरिषद ने मना कर दिया।

















