युवा उत्सव के द्वितीय दिवस पर लेखन कला एवं एकाकी कला का प्रदर्शन किया गया

छतरपुर। श्री कृष्णा विश्वविद्यालय में आयोजित त्रिदिवसीय युवा उत्सव के आज दूसरे दिन लेखन विधा के अन्तर्गत गीत, कहानी कविता और निबन्ध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस विधा के संयोजक डॉ. आशीष कुमार तिवारी सदस्यगण डॉ. नीरज सिंह, डॉ. शिव विजय त्रिपाठी, डॉ. सचिन व्यास और वन्दना शुक्ला थी। कला प्रदर्शन विधा के अन्तर्गत एकांकी, हास्य नाटिका का आयोजन किया गया जिसमें संयोजक डॉ. आशीष कुमार पचौरी सदस्यगण- माधव शरण पाठक, वर्षा यादव, खुशबू सिंह चौहान, अनुप्रिया नामदेव रही।
उपरोक्त प्रतियोगिताओं में निर्णायक मण्डल में डॉ. आशीष पचौरी, डॉ. राजेन्द्र चौधरी डॉ. शिव विजय त्रिपाठी, रीना शर्मा, खुशबू चौहान ने निर्णायक भूमिका निभाई। विधाओं के समापन पर सभी छात्र-छात्राओं का लेखन कला के बारे में बताते हुए डॉ. आशीष कुमार तिवारी ने कहा कि लेखन से हम अपनी सृजन क्षमता का विकास करते है। अपनी भावनाओं अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए हम लेखन विधा को अपना माध्यम बनाते है। लेखन कौशल संचार और सोच कौशल को विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है। यह दूसरों और खुद को अपने विचारों को समझाने और परिष्कृत करने की हमारी क्षमता को भी बढ़ावा देता है। लेखन कौशल संचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालाँकि कोई भी मार्गदर्शक आपको यह पता लगाने में मदद नहीं कर सकता है कि आपके लिए लिखने के लिए कौन सी परिस्थितियाँ सबसे अच्छा काम करेंगी, लेखन प्रक्रिया में सामान्य चरण निरंतर खोज जांच, पूर्वलेखन, प्रारूपण, संशोधन और संपादन होते हैं। इनको ध्यान में रखते हुए लेखन विधा का अभ्यास करना चाहिए।
डॉ. आशीष पचौरी ने अभिनय के बारे में बताते हुए कहा कि अभिनय का उद्देश्य पात्रों को जीवंत करना और कहानियां बताना है । जबकि लेखकों का काम उन पात्रों और कहानियों को बनाना है,अभिनेता उन्हें पृष्ठ से हटाकर दर्शकों के सामने रखते हैं – चाहे वह दर्शक थिएटर में हों या टेलीविजन देख रहा हो। अभिनय चार प्रकार का होता है- आंगिक, वाचिक, आहार्य और सात्विक। अंगों की चेष्टा से जो अभिनय किया जाता है उसे आंगिक, वचनों से जो किया जाता है उसे वाचिक, भेस बनाकर जो किया जाता हैं उसे आहार्य तथा भावों के उद्रेक से कंप, स्वेद आदि द्वारा जो होता है उसे सात्विक कहा जाता हैं। कार्यक्रम का संचालन कु.अनुप्रिया नामदेव तथा माधव शरण पाठक द्वारा आभार व्यक्त किया गया।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ.ब्रजेन्द्र सिंह गौतम, चैयरमेन डॉ.पुष्पेन्द्र सिंह गौतम, कुलपति डॉ.अनिल धगट, उपकुलपति गिरीश त्रिपाठी, कुलसचिव, विजय सिंह ने कार्यक्रम की सफलता पर शुभकामनाऍं दी।

















