मध्यप्रदेश

स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ, मधुमेह से बचें: उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल

भोपाल। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के नागरिकों से मधुमेह की बढ़ती प्रवृत्ति को नियंत्रित करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अपने रक्त शर्करा और रक्तचाप की नियमित जांच कराएँ, संतुलित आहार लें, अत्यधिक शर्करा का सेवन न करें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें ताकि तनाव को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सके। उन्होंने मधुमेह की रोकथाम के प्रति सजग रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और स्वास्थ्य शिविरों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया है। सामूहिक प्रयास और जागरूकता से ही हम मधुमेह पर नियंत्रण पा सकते हैं और एक स्वस्थ मध्यप्रदेश का निर्माण कर सकते हैं।

नियमित जाँच करायें –
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार मधुमेह एवं अन्य असंचारी रोगों के प्रसार को कम करने के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रमों और पहलों के माध्यम से लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करके दिल के दौरे, किडनी और फेफड़े के रोग, अंधत्व और अन्य गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है। नागरिकों की समय पर स्क्रीनिंग, जांच की व्यवस्था की गयी है। नियमित जाँच से सही समय में समस्या का चिन्हांकन होता है, जिससे अपेक्षित सावधानियाँ एवं उपचार सहजता से किया जा सकता है। मधुमेह और उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए राज्य के सभी जिला अस्पतालों, सिविल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। 15 जिलों में असंचारी रोग बूथ स्थापित किए गए हैं ताकि मरीजों को अस्पताल के प्रवेश द्वार पर ही प्राथमिक जांच का लाभ मिल सके।

सरकार के समग्र प्रयास-
राष्ट्रीय असंचारी रोग रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत वर्तमान वर्ष में 38 लाख से अधिक नागरिक पंजीकृत हो चुके हैं और 86 लाख से अधिक बार हाई ब्लड प्रेशर एवं मधुमेह की जांच की जा चुकी है। एनएफएचएस-5 अनुसार राज्य में मधुमेह की प्रचलित दर वर्तमान में 13.5% है, जबकि उच्च रक्तचाप की दर 23.5% है। मधुमेह और संबंधित जटिलताओं को नियंत्रित करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। असंचारी रोग कार्यक्रम के तहत अब तक 3 करोड़ 58 लाख से अधिक लोगों का पंजीकरण हो चुका है, जिसमें 1 करोड़ 91 लाख से अधिक लोगों की रक्तचाप और रक्त शर्करा के लिए जांच की गई है। 19 लाख 57 हज़ार उच्च रक्तचाप के मरीज और 13 लाख से अधिक मधुमेह के मरीज वर्तमान में निःशुल्क उपचार प्राप्त कर रहे हैं।

हृदय से जुड़ी आपात स्थितियों के इलाज हेतु सभी 52 जिला अस्पतालों में आईसीयू की स्थापना की गई है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और अन्य प्रमुख जिलों में कार्डियक केयर यूनिट भी स्थापित किए गए हैं। सभी जिलों में केंद्रीय प्रयोगशालाएँ चौबीसों घंटे रक्त शर्करा, कोलेस्ट्रॉल, और हार्ट मार्कर जैसे आवश्यक परीक्षण प्रदान कर रही हैं। इसके साथ ही मधुमेह के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जीवनशैली में परिवर्तन के लिए शैक्षणिक अभियान चलाए जा रहे हैं। आमजन तक मधुमेह, उच्च रक्तचाप और रोकथाम के उपायों की जानकारी पहुँचाई जा रही है।

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