पितृपक्ष प्रारंभ: पूर्वजों को तर्पण और श्राद्ध से दें श्रद्धांजलि, पितृदोष से बचने का विशेष समय

कटनी@शेरा मिश्रा। विजयराघवगढ़ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) का शुभारंभ हो चुका है। इसे पितरों का पावन काल माना जाता है। श्रद्धालु इस अवधि में अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करते हैं।

कैसे करें पूजा-
पंडित राघवेश दास जी महाराज ने बताया कि पितृपक्ष में सूर्योदय के बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर तर्पण करना चाहिए। तर्पण के लिए कुशा, तिल, जल और पका हुआ अन्न अर्पित किया जाता है। ब्राह्मण भोज व दान भी पुण्यकारी है। उन्होंने कहा की पूर्वजों को जल, तिल और अन्न अर्पित करने से उनकी आत्मा तृप्त होती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
पितृदोष और हानियाँ-
महाज्ञानी राघवेश दास जी महाराज का कहना है कि जो लोग पितृपक्ष में श्राद्ध नहीं करते, उनके परिवार में पितृदोष प्रकट हो सकता है। पितृदोष के कारण संतान को बाधाएँ आती हैं, दांपत्य जीवन में अशांति रहती है और उन्नति रुक जाती है। इसलिए हर परिवार को श्राद्ध अवश्य करना चाहिए।
आस्था का संदेश-
पंडितों का कहना है कि पितृपक्ष केवल कर्मकांड नहीं बल्कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। यह परिवार को संस्कारों से जोड़ने और परंपराओं को आगे बढ़ाने का समय होता है।
(शेरा मिश्रा पत्रकार विजयराघवगढ़ कटनी)




