भोपाल

विशेष लेख: संवेदनशील सोच, सशक्त कदम,शांति और विश्वास की पहचान- मध्यप्रदेश पुलिस, नक्सल-मुक्त क्षेत्रों से लेकर जनकेंद्रित, तकनीक-आधारित सुरक्षा तक- सय्यद असीम अली

@भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस ने वर्ष 2025 में कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक सरोकार और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ दर्ज की हैं। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के कुशल नेतृत्व, दूरदर्शी सोच और सशक्त दिशा-निर्देशन में प्रदेश पुलिस ने न केवल अपराध नियंत्रण में प्रभावी भूमिका निभाई, बल्कि नागरिकों के प्रति संवेदनशील, तकनीक-आधारित और भरोसेमंद पुलिसिंग का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

महिला-बाल एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा में प्रभावी पहल
वर्ष 2025 में संचालित ऑपरेशन मुस्कान एवं मुस्कान विशेष अभियान के तहत मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रदेशभर से 14 हजार से अधिक गुमशुदा नाबालिग बालक-बालिकाओं को सुरक्षित दस्तयाब कर उनके परिजनों से मिलाया। उल्लेखनीय है कि यह अभियान केवल प्रदेश तक सीमित न रहकर अन्य राज्यों तथा नेपाल-पाकिस्तान सीमा से लगे क्षेत्रों तक विस्तारित रहा। इसी तरह सृजन अभियान के अंतर्गत 5 हजार से अधिक बालक-बालिकाओं को सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण देकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा गया, जिससे बाल विवाह, बाल हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक अपराधों की रोकथाम में ठोस परिणाम सामने आए।

अपराधों पर कड़ा अंकुश-
अवैध हथियारों के निर्माण, तस्करी और उपयोग के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए 2,266 फायर आर्म्स और 4,800 धारदार हथियार जब्त किए गए। अंतरराज्यीय हथियार तस्कर गिरोहों का पर्दाफाश कर अवैध फैक्ट्रियों को ध्वस्त किया गया। चोरी, लूट एवं डकैती के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए 132 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की चोरी की संपत्ति बरामद की गई। चोरी गए वाहनों की बरामदगी में 3,779 दोपहिया, 274 चारपहिया तथा 193 अन्य वाहन शामिल हैं।

जहाँ डर टूटा,भरोसा बना-
वर्ष 2025 मध्यप्रदेश पुलिस के लिए केवल उपलब्धियों का नहीं, बल्कि विश्वास निर्माण का वर्ष रहा। मध्यप्रदेश पुलिस ने बीते वर्ष में अपनी कार्यशैली से यह सिद्ध किया है कि सख़्त कानून-व्यवस्था और मानवीय संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति की बहाली, साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा के लिए त्वरित कार्रवाई ने जनता के मन से डर को दूर किया है। जनसंवाद, तकनीकी नवाचार और पारदर्शी प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से पुलिस और समाज के बीच विश्वास की नई मजबूत कड़ी बनी है। आज मध्यप्रदेश पुलिस केवल सुरक्षा बल नहीं, बल्कि भरोसे का ऐसा स्तंभ बन चुकी है, जिस पर समाज निडर होकर आगे बढ़ रहा है।
नक्सल उन्मूलन से लेकर साइबर अपराध नियंत्रण तक पुलिस ने सख़्ती और संवेदनशीलता का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत किया। ऑपरेशन मुस्कान के माध्यम से हजारों गुमशुदा बच्चों की सुरक्षित वापसी, “नशे से दूरी है ज़रूरी” जैसे जनआंदोलनों और डिजिटल पुलिसिंग ने जनता का भरोसा मज़बूत किया। डायल-112, साइबर हेल्पलाइन और तकनीकी नवाचारों से पुलिस की पहुँच तेज़ और पारदर्शी बनी। मध्यप्रदेश पुलिस ने साबित किया कि जब सुरक्षा के साथ संवाद जुड़ता है, तब डर टूटता है और विश्वास जन्म लेता है।

सुनती है, समझती है, साथ निभाती है-
मध्य प्रदेश पुलिस आज केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी बन चुकी है। बदलते समय के साथ पुलिस की भूमिका संवाद, संवेदनशीलता और सहयोग की दिशा में विस्तृत हुई है।जनसुनवाई, थाना स्तर पर संवाद कार्यक्रम, पुलिस चौपाल, महिला व साइबर सुरक्षा अभियान और सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस आम नागरिकों से सीधे जुड़ रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और समस्याओं के समाधान में तेजी आई है।महिला एवं बाल सुरक्षा के क्षेत्र में जागरूकता कार्यक्रम, हेल्पलाइन और विशेष सहायता डेस्क ने पीड़ितों का भरोसा मजबूत किया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन शिकायत प्रणाली ने दूर-दराज़ के लोगों तक पुलिस की पहुँच आसान बनाई है।ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस चौपाल और युवाओं के लिए संवादात्मक कार्यक्रम समाज में सहयोग और सुरक्षा की भावना को सशक्त कर रहे हैं।

नक्सल उन्मूलन में ऐतिहासिक सफलता-
वर्ष 2025 मध्यप्रदेश के लिए नक्सलवाद उन्मूलन की दृष्टि से ऐतिहासिक सिद्ध हुआ। तीन दशकों पुरानी नक्सल समस्या का योजनाबद्ध समाधान करते हुए प्रदेश को पूरी तरह नक्सल-मुक्त घोषित किया गया। बालाघाट, मंडला सहित प्रभावित जिलों में हार्डकोर नक्सलियों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई हुई। कई इनामी नक्सलियों को मुठभेड़ों में मार गिराया गया तथा आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2023 के अंतर्गत नक्सलियों ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण किया। इन कार्रवाइयों में शामिल 64 वीर पुलिसकर्मियों को क्रमोन्नति प्रदान की गई।

साइबर अपराध एवं डिजिटल सुरक्षा-
“Safe Click” पहल के माध्यम से डिजिटल जागरूकता और साइबर सुरक्षा को सशक्त किया गया। नागरिकों को सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार, फर्जी लिंक, एप्स, डिजिटल फ्रॉड, साइबर हेल्पलाइन 1930 एवं एनसीआरपी पोर्टल की जानकारी दी गई। साइबर फ्रॉड मामलों में त्वरित कार्रवाई कर नागरिकों की 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सुरक्षित वापस कराई गई। संगठित साइबर ठगी गिरोहों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 250 करोड़ रुपये से अधिक की राशि फ्रीज की गई।

नशामुक्त समाज की दिशा में जनआंदोलन-
“नशे से दूरी है ज़रूरी” अभियान के तहत प्रदेशभर में व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। 15 हजार से अधिक कार्यक्रमों में 22 लाख से अधिक नागरिकों की प्रत्यक्ष सहभागिता रही, वहीं 22 लाख से अधिक लोगों ने नशामुक्त समाज के लिए शपथ ली। सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान को 10 करोड़ से अधिक व्यूज़ प्राप्त हुए। इस दौरान 1 अरब 93 लाख रुपये से अधिक के अवैध मादक पदार्थ एवं 55 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध शराब जब्त की गई। एसटीएफ द्वारा हजारों किलोग्राम गांजा पकड़कर तस्करी नेटवर्क पर करारा प्रहार किया गया।

जनसुरक्षा, त्वरित सेवाओं, तकनीकी नवाचार और प्रशासनिक सुधारों का सशक्त समन्वय-
डायल-112 के अंतर्गत 1200 एफआरवी वाहनों का संचालन प्रारंभ किया गया, जिससे आपात स्थितियों में पुलिस की त्वरित पहुँच सुनिश्चित हुई।CEIR पोर्टल के माध्यम से 31,519 गुम मोबाइल फोन खोजकर उनके मालिकों को लौटाए गए।मध्यप्रदेश पुलिस ने e-HMRS, e-Office और ICJS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म लागू कर कार्यप्रणाली को पारदर्शी, डिजिटल और पेपरलेस बनाया।MANIT, भोपाल के साथ MoU के तहत Center of Excellence for Public Safety की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जिससे भविष्य की पुलिसिंग को और अधिक तकनीक-आधारित एवं मानवीय बनाया जा सके।

सम्मान और उपलब्धियाँ-
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा को हैप्पीनेस संस्था द्वारा “हैप्पीनेस चेंज मेकर अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया।
“नशे से दूरी है ज़रूरी” अभियान को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली।

“राजधानी से सीमावर्ती इलाकों तक, सुरक्षा का मजबूत कवच”-
राजधानी भोपाल से लेकर सीमावर्ती और दूरस्थ अंचलों तक मध्यप्रदेश पुलिस ने वर्ष 2025 में सशक्त सुरक्षा व्यवस्था स्थापित की। नक्सल उन्मूलन, अपराध नियंत्रण, साइबर सुरक्षा और जनसंवाद के माध्यम से पुलिस ने पूरे प्रदेश में भरोसे और सुरक्षा का मजबूत कवच तैयार किया है। मध्यप्रदेश पुलिस ने  नशामुक्ति, महिला-बाल संरक्षण और तकनीकी नवाचार के माध्यम से न केवल प्रदेश में शांति और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि नागरिकों के बीच सुरक्षा का विश्वास और पुलिस-जन संवाद को भी नई मजबूती प्रदान की है। मध्य प्रदेश पुलिस ने यह साबित किया है कि प्रभावी कानून-व्यवस्था जनता के विश्वास और सहभागिता से ही संभव है। संवाद और संवेदनशीलता के इन प्रयासों के लिए मध्य प्रदेश पुलिस वास्तव में सलाम के योग्य है।

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