आध्यात्मिक

तीन बिन्दुओं पर विचार अवश्य करें, वर्तमान राजनीति, हमारे कथावाचक व हमारा सनातनधर्म: धर्मसम्राट युगचेतना पुरुष परमहंस योगिराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज

@आध्यात्मिक। वर्तमान वर्तमान समय में देश की जो परिस्थितियां हैं, ऐसी परिस्थितियों में सनातनधर्मालंबियों देशप्रेमियों को सचेत होना आवश्यक हैं। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के बाद तीन बिंदुओं पर अवश्य विचार करें- वर्तमान राजनीति, हमारे कथावाचक और सनातन धर्म।

देश को केंद्र में एक सशक्त सरकार मिल चुकी है और हम इतना निश्चित हो सकते हैं कि हमारा देश सुरक्षित हाथों में है। लेकिन यह सोचकर देशवासी गलती करेंगे कि चाहे राज्य सरकारें हो या केंद्र सरकार, ये मानवता की रक्षा, देश की रक्षा कर सकती हैं, क्योंकि यह संभव नहीं है। आज की जो परिस्थिति हैं, उस पर पूरा देश विचार कर रहा है। ऐसा क्या हुआ कि एक अच्छी व सशक्त सरकार को कुछ ना कुछ विराम लगा? मेरा मानना है कि कोई भी सत्तापक्ष जब सशक्त हो जाता है, तो अहंकारवस कुछ न कुछ उससे गलतियां हो ही जाती हैं और यह इसी का परिणाम रहा। मोदी जी से भी यही गलतियां हुई है कि यदि वे चाहते तो देश को कई गुना आगे ले जा सकते थे।

एक तरफ आतंकी व खालिस्तानी मानसिकता की कांग्रेस पार्टी हैं, तो दूसरी तरफ देश के लिए कुछ न कुछ अच्छा कर रही भाजपा और यदि कोई भी विकल्प चुनेगा तो पहले बीजेपी को ही चुनेगा, क्योंकि उसके समक्ष अन्य कोई दल देश के लिए उचित नहीं है। वर्तमान में प्रधानमंत्री के रूप में मोदी जी ठीक है लेकिन पूर्व के 10 वर्षीय कार्यकाल में कुछ गलतियां उनसे भी हुई है और विशेष गलती यह है कि जहां देखो वहां मोदी मोदी बस यही नाम गूंजता रहा! कार्यकर्ताओं का कहीं नाम ही सामने नहीं आया उनमें शिथिलता आती चली गई, आम जनता से उनका संपर्क ही टूटता चला गया और इसी बीच जनता को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा। मोदी की जगह यदि बीजेपी का नाम सामने रहता तो पार्टी के कार्यकर्ता हतोत्साहित न होते।

गुरुवर नें कहा कि अयोध्यावासियों को गालियां दी जा रही है कि एक सांसद को भी नहीं जिताया। मेरा मानना है कि बिल्कुल नहीं जिताना चाहिए, क्योंकि सबक तो यही से शुरू होता है। बीजेपी यह सोचने के लिए विवश तो हो कि आखिर उससे गलती कहां पर हुई? आप भी सचेत होने की आवश्यकता है कि कार्य को प्रमुखता कहां से दी जानी चाहिए? बड़े-बड़े एयरपोर्ट, बड़ी-बड़ी सड़के, पुल बना देने से गरीबों का, बेरोजगारों का भला नहीं होने वाला। नि:शुल्क बीमा, 5 लाख तक के निःशुल्क इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड, लेकिन गरीबवर्ग इस कार्ड को लेकर भटकता रहता है। तथा 90% प्रतिशत लोगों को इस कार्ड का लाभ ही नहीं मिलता और यदि किसी को मिलता भी है तो पहले पच्चीस- पचास हजार जमा करने के लिए कहा जाता है। मोदी जी को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। एक बार संकल्प ले लेतें की रामराज्य लाना है, तो जिस जगह राम मंदिर बनाया गया, उसी अयोध्या से रामराज्य लाने की शुरुआत करते। जिस अयोध्या में राममंदिर के लिए लोगों ने अपने जीवन तक की परवाह नहीं की, वहां एक भी सनातनी परिवार को रोजगार नहीं मुहैया कराया गया, गरीबी अट्टाहास लगा रही हैं।

सरकार को ध्यान देना चाहिए कि अयोध्या का एक भी व्यक्ति बेरोजगार ना रहे पांच- दस किलो अनाज दे देने से गरीबों का भला नहीं होने वाला, बल्कि उन्हें अपंग, निरीह बनाया जा रहा है। लोग भिखारियों की तरह नहीं, सम्मान का जीवन जीना चाहते हैं। यदि हर परिवार के, हर सनातनी परिवार की एक- एक सदस्य को नौकरी दी जाती, तो उनका विकास अपने आप हो जाता और इसे ही कहते हैं विकास। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता की अनेकों जगहों पर अयोध्या में भूमि घोटाला किया गया गरीबों से सस्ते दर पर भूमि लेकर ऊँचे दामों पर बेचीं गई और समय से मुआवजा नहीं दिया गया। एयरपोर्ट, सड़क, पुल बना दिए जाने से गरीबों का भला नहीं होने वाला। उनका भला होगा उन्हें नौकरी देने से, व्यवसाय से जोड़ने पर, नशा मुक्त समाज के निर्माण से। गरीबों का उत्थान कैसे हो? इस बात पर पहल करने की जरूरत हैं।

गुरुवर नें कहा कि मोदी जी ने देश में अच्छी सरकार चलाई और आगे भी चलायेंगे, इससे इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन गरीबों का उत्थान नहीं किया गया और इसी बात का फायदा राहुल गांधी नें उठाया। राहुल गांधी नें यही तो कहा था कि केजरीवाल से मुझे बहुत कुछ सीखना हैं और यही सीखा कि जिस देश की जनता कों हमने इतने सालों तक गरीब बनाकर रखा, नेहरू खानदान नें जबसे शासन किया, गरीबों कों सताया, उन्हें कमजोर बनाया। केजरीवाल से एक और सीख ली कि गरीबों की भावनाओं का किस तरह लाभ उठाया जा सकता हैं? फिर क्या था, फटाफट एक लाख देने की घोषणा कर दी गई। अब आप चाहे कितना भी अच्छा कार्य कर रहे हो, आपकी कौन सुनने वाला हैं?

गरीब व्यक्ति जो अनपढ़ है, जिन्हें शिक्षा नहीं दी गई, जिन्हें वेद- शास्त्रों का ज्ञान नहीं कराया गया, जिन्हें राष्ट्रभक्ति का पाठ नहीं पढ़ाया गया, जिनकों नजदीकता नहीं दी ग, जिन्हें अछूत माना गया, जिनकों स्वयं से दूर रखा गय, मेरा मानना है कि यदि एक लाख रूपये का लालच मिला, तो भी भटकेंगे ही। जो हमारे देश की स्तंभ थे, चाहे आजादी की लड़ाई रही हो, चाहे देश के निर्माण की बात हो, जो सभी कामों में सबसे आगे रहे, आज उन गरीबों, मजदूरों, नौजवानों को दयनीय स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया गया हैं। उनके उत्थान के लिए, उनके अधिकारों की रक्षा के लिए, एक सशक्त कानून बनना चाहिए, व्यवस्था बनानी चाहिए। केवल जातिगत थोड़ा आरक्षण देकर किसी का उत्थान नहीं किया जा सकता, बल्कि जाति, वर्ग, संप्रदाय से अलग हटकर एक सशक्त व्यवस्था की जरूरत है।

वही गुरुदेव भगवान नें आगे कहा की देशवासियों को लालच देकर खरीदना चाहते हो! राहुल गांधी ऐसा सोचना भी मत कि देश की सत्ता की बागडोर संभालने का तुम्हें मौका मिलेगा, अभी बहुत पापड़ बेलने पड़ेंगे। कांग्रेस पार्टी का सबसे बड़ा विरोधी यदि कोई है तो वह मैं हूं और आतंकी मानसिकता की कांग्रेस पार्टी का जो भी समर्थन करता है वह देश का सबसे बड़ा विरोधी है और ऐसे लोगों का बहिष्कार होना चाहिए।

भृष्ट नेताओं के चुनाव लड़ने पर लगनी चाहिए रोक-
गुरुदेव भगवान ने आगे कहा कि भ्रष्टाचारी नेताओं, आतंकी व खालिस्तानी मानसिकता के लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक लगनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है और यही कारण है कि अमृतपाल जैसी खालिस्तानी मानसिकता के लोग चुनाव जीत जाते हैं! क्या यही लोकतंत्र है? भ्रष्टाचार चरम पर व्याप्त हैं, इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। विधायक या सांसद बने नहीं की अपने-अपने क्षेत्र में पहुंचकर नशामाफियाओं को संरक्षण देने में लग गए हैं। मेरा भगवती कल्याण संगठन इतना सशक्त है कि उसके कार्यकर्ता गांव- गां, शहर- शहर में है और कार्यकर्ता मुझे हर घटना की खबर देते रहते है। हमारी तीनों धाराएं- भगवती मानव कल्याण संगठन, पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट और भारतीय शक्ति चेतना पार्टी, देश के कोने- कोने में जाकर लोगों को नशे- मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् बनाते हुए हैं सनातनधर्म को अक्षुणय बनाए हुए हैं।

किनसे पहुंच रही सनातन धर्म कों क्षति?-
हमें सनातनधर्म कोंअक्षुणय बनाए रखना है, लेकिन आज के कथावाचक जो सनातनधर्म के ध्वजवाहक बने हुए हैं, उनसे ही सनातन को ज्यादा क्षति पहुंच रही है और ऐसे ही कथावाचकों की जय- जयकार राज सत्ताए कर रही हैं। केवल 10% प्रतिशत कथावाचक ही सही है, जबकि 90% प्रतिशत कथावाचक अन्यायी- अधर्मी, लोभी- लम्पट और दुराचारी हैं। इतिहास उठाकर देखें, तो पाएंगे कि इन कथावाचकों के वक्ता हमारे ऋषि मुनि थे, जो त्यागी थे, तपस्वी थे। आज के 90% प्रतिशत कथावाचक अपने कथा समारोहों में नाच- रास- रंग को प्राथमिकता देते हैं, बारबालाओं कों बुलाकर नचाया जाता है और कहते है की गीत- संगीत से भीड़ जमा होती है। कथाओं में जाने वाले अनेकों लोगों तो कहते हैं कि हम तो नाच का मजा लेने जाते हैं और यही कारण है कि युवा वर्ग आस्थाहीन होता जा रहा है। ऐसे लोगों से सजक रहने की जरूरत है। हमारे ऋषि- मुनि तप करते थे, तपस्वी थे। मैं संगीत का विरोधी नहीं हूं लेकिन जहां जिस चीज की आवश्यकता है, वही अच्छी लगती है।

गुरुवर कहते हैं कि आज जो अनेक लोग कुकुरमुत्ते की तरह पर्चा बनाने जैसे चमत्कार दिखाते हैं, तो हमारे सनातनधर्म में चमत्कार को कभी प्राथमिकता नहीं दी गई। सनातन धर्म किसी की बपौती नहीं है। किसी भी काल का इतिहास उठाकर देख ले, चाहे वह गरीब हों सफाईकर्मी हो, हर वर्ग के लोग वेदज्ञानी रहे हैं। चमत्कार के नाम पर सनातन कों खोखला मत करो। ढोंगी- पाखंडियों के बनाए नियमों से सनातन खोखला होता जा रहा है। जिस बौद्धधर्म को हम अपना मानते हैं, जो हिंदूधर्म का एक अंग है, जिसको हमने शरण दे रखी है, आज वही हिंदूधर्म का विरोध कर रहे हैं और सनातन के अपमान पर हमारे शंकराचार्य चुप्पी साधे हुए हैं!

(संकलनकर्ता- आशुतोष द्विवेदी संपादक शक्ति न्यूज)

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