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भविष्य की आहट/ संसार की शांति को नस्तनाबूद करती ट्रंप की दादागिरी: डा. रवीन्द्र अरजरिया

डेस्क न्यूज। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समारोह में खालिस्तानी आतंकवादी गुरुपतवंत सिंह पन्नू की मौजूदगी और उसके व्दारा खालिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाने की घटना ने अमेरिका के नवीन दृष्टिकोण की बानगी प्रस्तुत की है।

सोशल मीडिया में यह वीडियो वायरल होने के बाद भी वहां की सरकार ने किसी प्रकार का कोई संज्ञान नहीं लिया है। खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने स्वयं एक्स हैंडल पर वीडियो शेयर किये, जिसमें वह राष्ट्रपति ट्रंप के आधिकारिक उद्घाटन (द लिबर्टी बॉल) के विशेष अतिथि होने का दावा भी करता है। खालिस्तान समर्थकों ने ही प्रयागराज में चल रहे महाकुम्भ में आगजनी करने की जिम्मेवारी भी ली है। आतंकी सरगनाओं व्दारा अमेरिका, कनाडा, इंग्लैण्ड, चीन, दुबई, पाकिस्तान, बंगलादेश, तुर्किये, सीरिया, ईरान, ईराक आदि देशों में बैठकर भारत विरोधी एजेन्डा चलाये जा रहे हैं।

खालिस्तानी आतंकवादियों के अलावा इस्लामिक कट्टरपंथी गिरोहों, अनेक जेहादी संगठनों, नक्सलवादियों, खूनी क्रान्ति के पक्षधरों तो अब हथियारों की सप्लाई करने वाले देशों के लिए एक बडी मण्डी बन गये हैं। विकासशील देशों की सरकारों को अस्थिर करने हेतु अनेक हथियार निर्यातक देश निविध्न रूप से षडयंत्र कर रहे हैं। बंगलादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान, अफगानस्तान, श्रीलंका आदि इसके जीवंत उदाहरण हैं। अमेरिका के खास नुमाइन्दों ने पहले बंगलादेश की सरकार को अपने प्रभाव में लेने का प्रयास किया जब सफल नहीं हुआ तो वहां पर छात्र आन्दोलन की आड में आतंक फैलाना शुरू कर दिया।

बंगलादेश की वर्तमान सरकार भी अमेरिका का ही एक सफल अभियान था। वर्तमान में बंगलादेश का पाकिस्तान प्रेम और चीन की ओर दिखने वाला बनावटी झुकाव भी अमेरिका की ही कुटिल चाल का परिणाम है ताकि भारत अपनी विकास यात्रा के लक्ष्य को भूल कर सीमाओं की सुरक्षा में जुट जाये। दूसरी ओर मणिपुर में मैतेई और कुकी लोगों के मध्य आतंकवादियों की घुसपैठ करवाने के बाद वहां हमले शुरू करवा दिये गये। राज्य में मैतेई समाज की 64.6 प्रतिशत जनसंख्या होने के बाद भी उन्हें 10 प्रतिशत भूभाग में ही समेट दिया गया है।

आतंकियों के व्दारा स्थानीय लोगों पर जुल्म ढाने का लक्ष्य हासिल करने वाले षडयंत्रकारी अब रक्तरंजित खेला करने में जुट गये हैं। यही हाल पश्चिम बंगाल का है जहां बंगलादेशियों की भरमार है। इस राज्य के घुसपैठिये अब समूचे देश में फैल चुके हैं। देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई में सैफ अली खान पर हमला भी बंगालादेशी ने ही किया था। यह प्रसिध्द व्यक्ति पर किया गया आपराधिक कृत्य था, सो चर्चा में आ गया अन्यथा ऐसी वारदातें तो देश के कोने-कोने में रोज ही हो रहीं हैं।

मीरजाफरों की फौज के साथ मिलकर रोहिंग्या मुसलमान और बंगलादेशी सहित अनेक घुसपैठिये अपने भारतीय नागरिकता संबंधी दस्तावेज तैयार करवा लेते हैं और शान से अपराध की दुनिया में कदम रखकर चन्द दिनों में ही करोडपति बन जाते हैं। दुकानों पर नौकरी ढूंढने वाले कुछ सी समय में आलीशान बंगलों, कारों और व्यवसायों के मालिक बनकर राष्ट्रद्रोही राग अलापने लगते हैं। विदेशी आकाओं के इशारे पर इन असामाजिक तत्वों को तत्काल राजनैतिक संरक्षण भी मिल जाता है। अमेरिका, चीन और पाकिस्तान के हथियार विक्रेताओं के साथ-साथ अनेक मुस्लिम देशों में बनाये जाने वाले ड्रोन सहित घातक विस्फोटक बेचने वाले भी नियमित रूप से इन असामाजिक तत्वों को अग्नेय शस्त्र बेच रहे हैं।

इस तरह की अवैध आपूर्ति का भुगतान षडयंत्रकारी देशों की सरकारों के इशारों पर उनकी गोद में बैठे संदिग्ध धनपशुओं व्दारा आतंकी सरगनों को खुलेआम किया जा रहा है। विदेशों में सुरक्षाचक्र के अन्दर से इनामी बदमाश आये दिन धमकियां देने, अपने सिपाहसालारों से अशांति फैलाने, राष्ट्र विरोधी गतिविधियां चलाने जैसे काम कर रहे हैं। दुनिया का स्वयंभू ठेकेदार बन बैठे अमेरिका ने इजराइल को घुटनों पर ला दिया और अब रूस पर दबाव बना रहा है। हमास ने मात्र तीन बंधकों के बदले में 100 खूंखार आतंकी छुडा लिये जो आने वाले दिनों में अनगिनत लोगों पर मौत बनकर मडरायेंगे। इस समझौते से दुनिया भर के आतंकवादियों के हौसले सातवें आसमान पर पहुंच गये हैं।

तालिबान के बाद हमास की जीत से मुस्लिम कट्टरपंथियों के आतंकी गिरोहों ने अमृतपान कर लिया है। वे रक्तबीज बनकर समूची दुनिया में मनमानियां करने के लिए युध्दस्तर पर जुट गये हैं। मुख में राम, बगल में छुरी की कहावत को चरितार्थ करने वाला अमेरिका हमेशा से ही धोखेबाजी का मुखिया रहा है। वर्तमान में वहां के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणाओं से तो समूचा संसार आश्चर्यचकित है। नागरिकता वाले मुद्दे पर तो वहां के न्यायालय तक ने दांतों तले अंगुलियां दबा लीं हैं। सिएटल में संघीय न्यायाधीश जान कफेरोन ने ट्रंप के सिटिजनशिप आर्डर पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश ने 22 राज्यों तथा अप्रवासी अधिकार समूहों की याचिका पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रपति के आदेश को असंवैधानिक करार दिया है।

याचिकाकर्ताओं ने ट्रंप के फरमान को वहां के संविधान के 14वें संशोधन के नागरिकता खण्ड में निहित अधिकार का उल्लंघन बताया जबकि न्याय विभाग के वकील ब्रेट शउमेट ने अपना पक्ष रखने के लिए और समय मांगा यानी सरकारी वकील भी ट्रंप के आदेश के संवैधानिक धरातल से अनभिग्य थे। यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि संसार की शांति को नस्तनाबूद करती ट्रंप की दादागिरी से आने वाले समय में समस्याओं का अम्बार लगने की संभावना बलवती होती है। तेल के दाम पर नियंत्रण, निवेश का दबाव, आयात करने को मजबूर करने वाले प्रस्ताव, विश्व संगठनों को मुट्ठी में लेने की कोशिशों सहित अनेक कार्यों की बानगी देखने को मिल गई है।

ऐसे में प्रयागराज में चल रहे महाकुम्भ में पधारे अघोरी बाबा कालपुरुष की भविष्यवाणी सत्य होती प्रतीत हो रही है जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं पिछले सात महाकुम्भों में आया हूं, हर बार मैं इस क्षेत्र से चला हूूं लेकिन इस बार संकेत अलग हैं, दाह संस्कार स्थल पर कौवे एक अलग ही गाना गा रहे हैं, मुर्दे ज्यादा बेचैन होते हैं, चिता जल जायेगी, हवा काली हो जायेगी, नदी को सब याद है जो आदमी भूल गया, जब गंगा रोयेगी तो आंसू मैदानों पर गिरेंगे, धरती अपनी सांसे बदल रही है, पहाड अपनी बर्फ छोड देंगे, कई मंदिर धरती पर लौटेंगे, जब नदी अपना रास्ता बदलेगी तो शहरों को एहसास होगा कि वे उधार की जमीन पर बसे हैं, अगले चार वर्ष में आकार लेंगे जिसे मनुष्य स्थाई या शाश्वत मानते है, यह शुरू हो गया है।

अघोर साधना को समर्पित बाबा कालपुरुष के अनगढ और अटपटे शब्द संकेत ठीक नास्त्रेदमस की तरह ही हैं जिनका विस्तार अध्यात्मिक संकेतों के विश्लेषक या फिर अघोर पंथ के किसी बडे तपस्वी से ही जाना जा सकता है। मगर वर्तमान में जिस तरह से अमेरिका, चीन, रूस सहित अनेक मुस्लिम राष्ट्र अपनी विस्तारवादी नीतियों पर मानवता की बलि देने पर तुले हैं, उससे भविष्यवाणी का प्रथम चरण प्रभावी होता दिख रहा है। यदि इसे झुठलाना है तो रेखांकित राष्ट्रों के आम नागरिकों को अपने देश की नीतियों-रीतियों की निष्पक्ष समीक्षा करके सकारात्मक आंदोलन छेडना होगा तभी मानव और मानवता संरक्षित रह सकेगी। इस बार बस इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी।

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