श्री दुर्गा चालीसा पाठ के कीर्तन और श्रवण से सहज ही हृदय में भक्ति जागृत होती है: श्री अजय अवस्थी जी

शहडोल। श्री दुर्गा चालीसा पाठ धर्मग्रंथों में वर्णित नवधा भक्ति का दूसरा सोपान कीर्तन का ही एक रूप है, जिसके माध्यम से ईष्टदेव के नाम, गुण, लीला और महिमा का गुणगान किया जाता है। भगवती मानव कल्याण संगठन के केंद्रीय महासचिव एवं सिद्धाश्रम रत्न श्री अजय अवस्थी जी नें बताया की दुर्गा चालीसा पाठ के कीर्तन और श्रवण से सहज ही हृदय में भक्ति जागृत होती है।
श्री दुर्गा चालीसा के हर शब्द मंत्र के समान पवित्र, पावन और दिव्य हैं। इसके उच्चारण और श्रवण मात्र से हृदय में दिव्य स्पंदन उत्पन्न होने लगता है। पंचज्योति शक्तिपीठ सिद्धाश्रम धाम के हृदय में स्थित श्री दुर्गा चालीसा पाठ मंदिर में श्री दुर्गा चालीसा का अखंड अनुष्ठान आनंत काल के लिए चल रहा है।
आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक भक्ति, ज्ञान, आत्मशक्ति और वैराग्य की प्राप्ति के लिए श्री दुर्गा चालीसा पाठ पूर्णतः पर्याप्त और परिपूर्ण है। इसके नियमित और भावपूर्ण पाठ से माँ भगवती की कृपा, करुणा और वात्सल्य का अनुभव सहज ही किया जा सकता है।
इसलिए, निखिल ब्रह्मांड की जननी, समस्त आत्माओं की जननी, आराध्य देवी माँ भगवती की कृपा प्राप्त करने और लौकिक व अलौकिक समस्याओं के समाधान के लिए श्री दुर्गा चालीसा पाठ का नियमित अभ्यास करें।

















