विकृत मानसिकता के साधू- संतो पर अधिक विश्वास करना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने के बराबर: आशुतोष द्विवेदी

@डेस्क न्यूज। हमारी भारतभूमि ऋषि- मुनियों, साधू- संतो, साधकों एवं महापुरुषों की भूमि हैं। इस पावन धरा पर सिद्धपुरुषों नें समय- समय पर अवतरित होकर जनकल्याणकारी कार्य करके समाज कों मानवता के पथ पर आगे बढ़ाया हैं। जब- जब मनुष्य अपने मूल मार्ग से भटककर कुमार्ग या अधर्म की ओर बढ़ा तब- तब सच्चे संतों महात्माओं ने ही सही राह दिखाई। यहां तक कि जब मानवता की ऊपर अनीति- अन्याय- अधर्म व अत्याचार हुआ, तो उस सबसे मुक्ति दिलाने के लिए उनकी अहम भूमिका रही और इसलिए हर काल में दिव्य पुरुषों की पूजा होती है वही ऐसी विकृत मानसिकता के साधू- संतो पर अधिक विश्वास करना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने के बराबर हैं।

भारतीय संस्कृति व सभ्यता ऋषि- मुनियों की देन है। इस परंपरा को बनाए रखने के लिए, उच्चकोटि के साधनों का होना जरूरी है, जिसकी वजह से आज भी भारतीय संस्कृति बची हुई है। लेकिन आज वर्तमान में धर्माचार्य, साधु – संत अपने धर्म से भटके हुए हैं और धर्म की आड़ में समाज को लूट रहे हैं। वे समाज को सही दिशा देने में असमर्थ हैं, जिसके कारण आज समाज पतन की ओर जा रहा है। भोली- भाली जनता का शोषण करने में लगे धर्माचार्य, साधु- संत और कथावाचक कथाएं सुनाकर, आडंबरपूर्ण धार्मिक क्रियाएं कराकर समाज को भ्रमित करने का कार्य कर रहे हैं। समाज आज व्यथित परेशान हैं दु:खी है, मानवता पतित हो रही है, अनीति – अन्याय- अधर्म बढ़ रहा है, पर साधु- संतों के द्वारा मानवता की हित में कोई कार्य नहीं किया जा रहा है, बस इन्हें तो धन और सम्मान से प्रेम है।
वर्तमान में साधु- संत धन प्रलोभन व वासनाओं में लिप्त हो चुके हैं और भी गरीबों की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं तथा भ्रष्ट राजनेताओं के साथ मिलकर समाज को दिशाहीन करने में लगे हुए हैं। अनेक को धर्माचार्य अपनी मर्यादाओ को लांघकर व्यभिचार, हत्या जैसे घिनौने कार्य करने में लिप्त हैं। इसी प्रकार की घिनौनी हरकत, घटिया मानसिकता वाले साधु- संत समाज के बीच संप्रदायिकता जैसा खतरनाक बीज बोने का कार्य कर रहे हैं। दो धर्म के बीच सांप्रदायिकता की खाई खोज कर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं।
प्रमाणित है की अनेकों ढोंगी, पाखंडी बाबा जिनके ऊपर यौन शोषण, बलात्कार हत्या आदि के आपराधिक मामले दर्ज हैं, उन्हें अपराधी घोषित किया गया है, वे आज भी बोली आज भी जेलों की सलाखों के पीछे अपनी सजा काट रहे हैं।
आज जहां लोग साधु- संतों को भगवान से भी ऊपर दर्जा देते हैं, उनके लिए भक्त अपना घर परिवार छोड़ देते हैं और उनको सब कुछ मान बैठे हैं वहीं कुछ ऐसे आडंबरी साधु- संत उनकी भावनाओं के साथ गद्दारी करके उनको लूटने चले जाते हैं। समाज का ऐसी विकृति मानसिकता के साधु- संतों पर अधिक विश्वास करना ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मानने के बराबर होता है।
किसी धर्माचार्य साधु- संत को अपना गुरु बनाने से पहले उसके अतीत तथा वर्तमान में चल रहे उसके कार्य क्षेत्र को देखकर और जो मानवताहित, धर्मरक्षा, राष्ट्ररक्षा का हितेषी हो ऐसे योगी को ही अपनें गुरु के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
ऋषियों- मुनियों की परंपरा को बनाए रखने के लिए एवं समाज में व्याप्त अनीति- अन्याय- अधर्म व अत्याचार और मानवता पर हो रहे शोषण को समाप्त करने के लिए धर्मसम्राट युग चेतना पुरुष परमहंस योगिराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराजका इस पावन धरा पर अवतार हों चुका है और ढोंगियों, पाखंडियो, धर्माचार्यो, कुकर्मी संतों को ठोकर मारने का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है।
परम पूज्य सदगुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज अपने अनुयायियों के माध्यम से युग परिवर्तन का शंखनाद कर चुके हैं, जिस शंखनाद की आज बड़े – बड़े तथाकथित धर्माचार्यो, शंकराचार्य, योगाचार्य एवं भृष्ट राजनेताओं के पैरों के नीचे जमीन खिसकने लगी है।
महाराज श्री के द्वारा भगवती मानव कल्याण संगठन, जिसके सभी सदस्य पूर्णतः नशामुक्त, मांसाहारमुक्त, चरित्रवान् एवं चेतनावान् है वे धर्मयोद्धा बराबर मानवता की सेवा, धर्मरक्षा और राष्ट्ररक्षा के लिए सतत प्रयासशील है।
(आशुतोष द्विवेदी संपादक शक्ति न्यूज)

















